Tuesday, August 6, 2024

संघ शासन हेतु संघ संसद



#संघ
जुड़ेंगे, जीतेंगे
जिद्द है, जुड़ने की
जब जुड़ेंगे, तब जीतेंगे
जितना जुड़ेंगे, उतना जीतेंगे
जहां जहां जुड़ेंगे वहां वहां जीतेंगे
जैसे जैसे जुड़ेंगे वैसे वैसे जीतेंगे
जो जुड़ेंगे वो ही जीतेंगे
अभी जुड़ेंगे तो अभी जीतेंगे
100 साल बाद जुड़ेगे तो 100 साल बाद जीतेंगे
जुड़ोऔर जीतो!

:::संघ:::
ऐसा संघ जो अच्छे #स्वतंत मार्ग पर चले।
ऐसा संघ जो सीधे #बन्धुत्त मार्ग पर चले। 
ऐसा संघ जो विधि #न्याय मार्ग पर चले।
ऐसा संघ जो उचित #समता मार्ग पर चले।
ऐसा समण संघ। हमर अपना #समण संघ।
ऐसा समण संघ जो
बमणों का नहीं, समणों का संघ है। 
विषमता का नहीं, समता का संघ है।

°संघ Sangh°

Ten Golden Rule of Saman Sangh
1. Only Saman be innate members. 
2. Never ever Chanda in sangh. 
3. Never ever caste practices. 
4. Only Sanghwad no individualism in sangh. 
5. Sangh never offers to postposition daise and garland. 
6. Never ever the registration of saman Sangh. 
7. Order of the sangh is Ultimate. 
8. Sangh will never enter into politics. 
9. Never ever return of the sangh traitor. 
10. Nine rules unchangeable eternal and permanent.

" दस गोल्डन नियम" (Ten Golden Rule)
1. समण संघ में केवल समण ही आ सकते हैं
2. समण संघ में कभी चन्दा नहीं लिया जायेगा
3. हम केवल समण हैं, संघ में कभी जाति का अभ्यास नहीं होगा. यानि किसी भी जाति के नाम का संबोधन नहीं किया जायेगा
4. समण संघ में केवल संघवाद रहेगा, व्यक्तिवाद को कोई स्थान नहीं
5. संघ में कभी भी पद-प्रतिष्ठा-मंच-माला को कोई स्थान नहीं होगा.
6. समण संघ का पंजीकरण कभी नहीं होगा
7. संघादिसेस यानि संघ का आदेश सभी के लिए सबसे ऊपर रहेगा
8. संघ राजनीति में कभी नहीं जायेगा
9. संघ घातक की वापसी संघ में कभी नहीं होगी
10. उपरोक्त 1 से 9 तक के नियम संघ का आधार हैं, ये ना कभी बदले जायेंगे और ना ही कभी ख़त्म किये जायेंगे और ना ही कभी अमान्य किये जायेंगे।

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रोज़ाना शायं 8 बजे से 11बजे
Join कीजिए इस 👇लिंक पर..
https://us02web.zoom.us/j/82044258465...
और आईडी पासवर्ड 👇ये रहेगा।
Meeting ID: 820 4425 8465
Passcode: 1234
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we the people समण संघ का हिस्सा बनकर जुड़िए और लोगो को जोड़िए।
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‘समण संघ’ :-  बुद्ध से पहले एक संघ चलता था 'समण संघ'। जिसे हमारे ही पुरखों ने चलाया था। सभी प्रकार के निर्णय और फैसले संघ के द्वारा ही किये जाते थे। संघ का निर्णय ही सर्वोपरि माना जाता था। संघ के द्वारा ही चक्रवर्ती महान सम्राट अशोक ने स्वर्णिम शासन चलाया। सम्राट अशोक ने ही अपने शासन के दौरान “महाभारत” बनाया था।
बम्मण लोग जब भारत में आये तो हम समता में रहने वाले ‘समण-समणी’ कहलाये गए। बाद में समण शब्द को ही विकृत करके और काल्पनिक किस्सों और कहानियों के जरिए हमारी समण संस्कृति विलुप्त होती चली गयी, आज उसी समण संघ को फिर से झाड़ पोंछ कर अपने समण लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। बुद्ध ने बार-बार संघ की शरण में जाने को कहा है- ‘संघं शरणं गच्छमि’। बाबा साहब ने भी भारत गणराज्य संघ ही दिया है। समण संघ ही हमारे देश का सबसे पुराना संघ है। और केवल हम ही संघी हैं।
वास्तविक संघ की परिकल्पना लोगों के लिए, लोगों के द्वारा ही संचालित होती है। संघ का कोई नेता नहीं होता। संघ में कोई पद या पदाधिकारी नहीं होता। संघ के लिए कोई चंदा, पर्ची, शुल्क आदि नहीं लिया जाता।
We the People की ऑनलाइन मीटिंग zoom app (ज़ूम एप) पर रोजाना शाम को ठीक 8 बजे से होती है जिसमें समण समाज के देश भर के बुद्धिजीवी लोग शामिल होते हैं और जुड़ने व जोड़ने का लगातार कार्य कर रहे हैं। दुनिया भर के लोग जुड़ चुके हैं और आगे जोड़ रहे हैं।

Saturday, August 3, 2024

संघ शासन हेतु संघ संसद

 



#संघ

#मैंसंघहूँ

#मैंसमणहूँ

#मैंसमणसंघहूँ

#Sangh

#IamSangh

#IamSaman 

#IamSamanSangh

समण सभ्यता, समण संस्कृति, समण संस्कार, समण पराम्परा, समण रीति-रिवाज, समण रस्म, समण रुढ़ी, समण पुरखे, समण सियान, समण महापुरुष, समण संत, समण परिपाटी, समण विरासत, समण धरोहर, समण कृषक, समण धन्नासेठ, समण व्यापारी, समण शासक, समण सेवक, समण समाज, समणों की सम विषम परिस्थितियों के चलते हमारा संघ घायल हुआ टूटता गया क्योंकि किसी ने संघघात पहुंचाने के लिए अमुक नाम देते गये कोई कुनबा बोला, कोई कुटुंब बोला, कोई कबीला बोला, कोई आदि निवासी बोला, कोई आदि वासी बोला, कोई मूल निवासी बोला, कोई शिकारी बोला, कोई हंटर गेदरर बोला, कोई जंगली जानवर बोला, कोई वन वासी बोला, तो कोई मेरे काम से बांध दिया काम से बांट दिया तो कोई किसान, तो कोई कमेरा, तो कोई कुम्हार, तो कोई चमार, तो कोरी, तो कोई....तो कोई सरकारी पहचान का ठप्पा लगा दिया तो कोई आरक्षण तो कोई दलित आदिवासी पिछड़ा तो कोई एससी एसटी ओबीसी पहचान के कार्ड बांटे दिये। ठीक वैसे जैसे राजनीति के ठप्पे लगे कांग्रेसी बहुजन भाजपा के ठप्पे पीठ में लगायें...

फिर वादी कहना शुरू कर दिया, बुद्धवादी, कबीरवादी, अम्बेडकरवादी, रैदासवादी, नानकवादी, कांशीरामवादी, बिरसावादी, तो कोई जलवादी तो कोई जंगलवादी तो कोई जमीन पहाड़ वादी...कौण कोण वादी हो लिख लो संघ उतना ही टूटता जायेगा तुम कमजोर हो जाओगे कुटुंब कुनबा कबीला कमेरा ढेरा संतो का ढेरा बिखरा तो धर्मों में संघ टूटेगा। तो तुम्हें टूटना है या इकट्ठा संघ में जुड़ना यहां संघ दो ही है। एक संघ जो तुम्हारी सुख सुरक्षा की उन्नति करने वाला.. दूसरा संघ जो तुम्हारा सब कुछ लूटने पीटने वाला... इसलिए समय रहते संघ से जुड़ों जोड़ों ना केवल तुम्हारे हक अधिकार छीने जाने रहे बल्कि तुम्हारी पहचान तुमसे छीनी जा रही है। हम समान मन के लोग समान दुःख दर्द के लोग समान सुख सुविधा के लोग किसके लिए लड़ रहे हो कौन तुम्हें लड़ा रहा है जबकि हमारी एक पहचान समन है हमारा मन वैसे है जैसे हमारी खून खाल रक्त मासमज्जा सुख दुःख भय वेद वेदना समान है। इसलिए #मैंसमनहूँ #मैंसंघहूँ #मैंसमनसंघहूँ!

एससी एसटी की जातियों में आरक्षण का वर्गीकरण

*बिग ब्रेकिंग न्यूज*

1,अगस्त 2024

*एससी एसटी की जातियों में आरक्षण का वर्गीकरण


करने का सुप्रीम कोर्ट  का फैसला संविधान के अनुच्छेद 341एवम 16(4)के विरुद्ध*

*सब क्लासीफिकेशन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पॉलिसी मेकिंग की श्रेणी में,जबकि सुप्रीम कोर्ट को संविधान में एडिशन डिलिशन, और मोडिफिकेशन का अधिकार नही मिला है*

*आर्टिकल 16 (4)  में राज्य सरकार को अनूसूचित जाति की सूची में संशोधन का अधिकार नही है बल्कि भारत के संविधान के प्रयोजन के लिए बनी scst की सूची में शामिल जातियों के ग्रुप को आरक्षण देने की ड्यूटी है*🙏🏾

*अनुसूचित जातियों की सूची में अब सब क्लासीफिकेशन कर अलग अलग जातियों में आरक्षण बांटने का अधिकार राज्य सरकारों को देने की संविधान विरोधी पैरवी की है केंद्र और पंजाब सरकार ने*🙏🏾

*सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखने के लिए अटॉर्नी जनरल तुषार मेहता के पत्र का जवाब सामाजिक न्याय मंत्रालय ने नही दिया*🙏🏾

*एससी का केंद्र की नौकरियों में 15% आरक्षण को 5% के हिसाब से यदि तीन भागों में बांटा तो आरक्षण का रोस्टर के हिसाब से 7,वे पद के स्थान पर,20 वा पद होगा आरक्षित  19 पदों तक की नौकरियां की रिक्तियों हो जाएंगी आरक्षण से बाहर*🙏🏾

समानित साथियों

   पदोन्नती  आरक्षण समाप्त करने के बाद  आज सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जातियों की सूची में सब क्लासिफिकेशन करने का अधिकार   राज्य सरकारों को दे दिया है अब राज्य सरकार  scst की सूची में सब क्लासिफिकेशन करके आरक्षण को कई भागों में बांट जा सकते है ,इस फैसले को scst के लोग अब तक के संविधान के सबसे बड़े नुकसान  के रूप में देख रहे है

                        18 वीं लोकसभा के पहले दिन प्रधान मंत्री संविधान का सजदा  कर और  विपक्ष के अधिकांश सांसद अपने साथ संविधान लेकर संसद गए और जब उनकी शपथ हुई तो उन्होंने संविधान को हाथ में लेकर शपथ ली और अधिकांश सांसदों ने जय भीम जय संविधान का नारा भी बुलंद किया ,देश के सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण पर एक ऐसा फैसला आ गया है जिसमें केंद्र सरकार और पंजाब राज्य की केजरीवाल सरकार ने अनुसूचित जाति की सूची में सब क्लासिफिकेशन की संविधान विरोधी पैरवी करके देश में अनुसूचित जाति के लोगों के साथ अब तक का सबसे बड़ा अन्याय किया है ,संविधान का अनुच्छेद 341 संसद को अनुसूचित जाति की सूची में से किसी भी जाति को शामिल करने  अथवा बाहर निकालने  की शक्ति प्रदान करता है  परंतु बीजेपी की केंद्र सरकार और पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी पैरवी की है , जो अधिकार संविधान में संसद को नहीं मिले  है उन अधिकारों को राज्य सरकार को देकर अनुसूचित जाति के आरक्षण में बटवारा कर उनको आरक्षण के लाभ से वंचित कर संविधान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला कराने में कामयाब हो गए है,   आज   सुप्रीम कोर्ट का 7 जजों का फैसला,7 :1 से जनता के सामने है संविधान पीठ में एक महिला जज ने संविधान के पक्ष में सब क्लासिफिकेशन को गलत बताया 

 संसद में जाते वक्त संविधान को माथे से लगाने वाले मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संविधान को हाथ में लेकर संसद में जाने वाले सांसदों की असली  परीक्षा आज से तय मानी जा रही है , सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 16(4) और 341  की जो व्याख्या की है उसे संविधान सम्वत नहीं कहा जा सकता ,जिन सांसदों को संविधान बचाने के लिए संविधान अनुयायियों ने लोकसभा में भेजा है उनसे उम्मीद ज्यादा है,

 मामला पुराना है 1975 में ज्ञानी जैल सिंह की पंजाब सरकार ने एक आदेश जारी कर पंजाब के  वाल्मीकि और मजहबी सिख  समुदाय के लोगो को एससी के आरक्षण में बंटवारा करके 50% आरक्षण देने का एक आदेश जारी कर दिया था जो लंबे समय तक चलता रहा 

      एक अन्य  मामला आंध्र प्रदेश राज्य का था जिसमें अनुसूचित जाति के आरक्षण को तत्कालीन आंध्र प्रदेश सरकार ने वर्ष 2000 में सब क्लासिफिकेशन कर  विधान सभा से एक्ट बना दिया जिसे ई वी चिन्नईया ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी और वह हार गया और राज्य सरकार अपने एक्ट को बचाने में कामयाब हो गई थी,

इसी आधार पर पंजाब सरकार ने भी वाल्मिकी और मजहबी सिख समुदाय के लोगो के लिए 50%,  आरक्षण का एक्ट 2006 में बना लिया

ई वी चिन्नईया ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के संविधान विरोधी सब क्लासिफिकेशन के आदेश को माननीय सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के माध्यम से चुनौती दी , नवंबर 2004 में ई  वी चिनय्या की  एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार हो गई और आंध्र प्रदेश सरकार का वर्ष 2000 का अनुसूचित जातियों में क्लासिफिकेशन का नोटिफिकेशन और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का संविधान विरोधी आदेश रद्द कर दिया , ई वी चिनय्या केस में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि यदि कोई आरक्षित वर्ग की जाती आरक्षण में पिछड़ रही है तो उसके लिए  आरक्षण का बंटवारा नहीं होगा बल्कि उसकी शिक्षा रोजगार और आर्थिक मामलों में राज्य सरकार मदद करें इसी आधार पर पंजाब सरकार का 2006 का नोटिफिकेशन भी पंजाब हाई कोर्ट में 2010 में निरस्त कर दिया उसके बाद पंजाब सरकार इस केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट आई और सुप्रीम कोर्ट में यह  एसएलपी के रूप में तीन जजों की बेंच के पास सुनवाई के लिए गया परंतु इस क्लासिफिकेशन के मामले में ई  वी चिन्नईया का पांच जजों का फैसला आड़े आ गया इस मामले में  कानूनी पक्ष तो यह

कहता है कि संविधान पीठ के 5 जजों के एकतफा फैसले के बाद पंजाब सरकार की एसएलपी खारिज करने के बजाय बड़ी बैंच को सौंप दिया

5 जजों की बैंच बनी तो फिर ई वी चिनय्या संविधान सम्वत फैसला बाधा बन गया उन्होंने भी पंजाब सरकार के अनुरोध पर 7 जजों की बैंच गठित करके ई वी चिनय्या के केस के रि विजिट rew करने की सिफारिश कर दी,

*सुप्रीम कोर्ट रूल 2013 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले को केवल Rew patition  या क्यूरेटिव पिटिशन के आधार पर पलट सकती है Rew patition फैसले के 30 दिन के अंदर दाखिल हो सकती थी, नवम्बर 2004 के जजमेंट को सुप्रीम कोर्ट नियमावली 2013 के विरुद्ध करीब 19 साल बाद चिनय्या केस reopen हुआ*

सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ के पांच जजों के फैसले के आधार पर  तीन जजों की पीठ को  पंजाब राज्य  की एसएलपी को चिन्नईया केस के आधार पर निरस्त कर देनी चाहिए थी क्योंकि बेंच के सामने संविधान पीठ का सिर्फ एक ही फैसला था इसलिए इस केस में बड़ी बेंच बनने का कोई औचित्य नहीं बनता था परंतु इस केस में बड़ी बेंच बनाने की सिफारिश  कर दी उसके बाद इस केस में पांच जजों की बेंच बनी और पांच जजों की,बेंच ने इस केस में और बड़ी बेंच बनाने की सिफारिश कर दी और यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया तेलंगाना विधान सभा चुनाव के समय मोदी जी एक चुनावी सभा को सम्बोधित कर रहे थे और वहां एससी की एक जाति के एक व्यक्ति ने  मंच पर आकर मोदी जी से अनुसूचित जाति की सूची में सब क्लासिफिकेशन कर अलग आरक्षण देने की मांग कर डाली मोदी जी ने उन्हें आश्वासन दिया कि हम तुम्हें अलग से आरक्षण  देंगे परंतु संवैधानिक व्यवस्थाएं केंद्र सरकार को इस काम को करने की इजाजत नहीं दे रही थी हालांकि बीजेपी तेलंगाना में चुनाव हार गई और तेलंगाना में कांग्रेस सरकार बन गई ,परंतु दक्षिण भारत में 

बीजेपी ने अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए फूट डालो राज करो के फार्मूले के चलते मोदी सरकार के प्रबंधको ने राजा के मुंह से तेलंगाना में आरक्षण बंटवारे के लिए निकले शब्द पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से रास्ता निकलवाकर एससी एसटी के आरक्षण पर चोट पंहुचा दी है,

 पंजाब सरकार का सब क्लासिफिकेशन मामले पर एक केस पेंडिंग था उसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में अचानक शुरू हो गई और उसमें आनन फानन में सात जजो की बेंच गठित कर दी गई अटॉर्नी जनरल  तुषार मेहता ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार को पत्र भेज कर केंद्र सरकार को अपना पक्ष बताने के लिए निवेदन किया परंतु केंद्र सरकार ने अटॉर्नी जनरल के सब क्लासिफिकेशन के पत्र का कोई जवाब नहीं दिया  इस केस में  पंजाब सरकार ने सब क्लासिफिकेशन करने की पूर जोर पैरवी भी की वही केंद्र सरकार ने भी अनुसूचित जाति की सूची में सब क्लासिफिकेशन कर आरक्षण के बंटवारे पर अपनी हामी भर दी , हालांकि इस मामले में पूर्व में  केंद्र सरकार ने भारत के सभी राज्यों से पत्र भेजकर सब क्लासिफिकेशन करने के संबंध में उनकी राय मांगी थी जिसमें 14 राज्यों ने संविधान के अनुच्छेद 341 का हवाला देकर सब क्लासिफिकेशन करने से मना कर दिया था वही सात राज्यों ने केंद्र सरकार के पत्र का कोई जवाब नहीं दिया था और सात राज्यों ने क्लासिफिकेशन करने का अनुरोध किया था, यह जवाब भी सुप्रीम कोर्ट में पूर्व में ही केंद्र सरकार की ओर से  पत्रावली पर उपलब्ध था,  पंजाब में क्लासिफिकेशन कर वाल्मीकि एवं मजहबी सिख  समुदाय को 50% आरक्षण का बंटवारा कर  आरक्षण कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा ने भी दिया और केजरीवाल सरकार भी जिस प्रकार संविधान की बात करते है और सुप्रीम कोर्ट में  केंद्र सरकार के साथ  मिलकर संविधान को नेस्तनाबूद करने की वकालत करते है  संविधान पर अब तक के सबसे बड़े हमले में कांग्रेस आम आदमी पार्टी और बीजेपी  तीनों  की सरकार शामिल है  राजनैतिक पार्टियों के फूट डालो और राज करो की चालाकी पर आज सुप्रीम कोर्ट  की मुहर लग गई है अब आने वाला समय बताएगा, की केंद्र सरकार इस फैसले पर रिव्यू पटीशन दाखिल करता है या संसद से इस फैसले को निरस्त करेंगे ,दूसरी परीक्षा विपक्ष की है जिन्होंने संविधान की रक्षा के मुद्दे पर चुनाव लडा वह अब क्या करेंगे , अनुसूचित जाति का एक बड़ा वर्ग निश्चित रूप से संविधान विरोधी फैसले से आहत है और उसने संविधान बचाने के नाम पर वोट दिया ,अब आने वाला समय बताएगा की संविधान  के सामने सजदा कर 18 वी लोक सभा के लिए नई संसद में जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जिन्होंने एक चुनावी सभा में कहा था कि यदि बाबा साहेब आंबेडकर जी भी धरती पर आ जाए वे भी संविधान को बदल नही पाएंगे ,विपक्षी सांसदों ने संविधान की किताब हाथ में लेकर संसद में जाने वाले  विपक्षी सांसदों की  एक बड़ी परीक्षा शुरू हो चुकी है ,जिसमें किसकी जीत होगी और किसकी हार होगी यह तो आने वाला समय बताएगा आरक्षण का बंटवारा होकर यह अधिकार राज्यों को चला गया  है  यह संविधान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला है इसकी भरपाई अनुसुचित जाति के   ना तो वो लोग कर पाएंगे जो अलग आरक्षण की मांग कर रहे है ,और ना वो कर पाएंगे जो संविधान को सब कुछ अपना मानते है ,आने वाली पीढ़ियां   सरकारों और सुप्रीम कोर्ट से सब क्लासिफिकेशन मांगने वालों का मूल्यांकन जरूर करेंगी संविधान बचाओ ट्रस्ट ने केस की पैरवी की है केंद्र सरकार ,पंजाब सरकार और देश के बड़े जाने माने वकीलों ने भले ही इस केस में संविधान के विरुद्ध पैरवी की हो ,परंतु संविधान बचाओ ट्रस्ट को संविधान सम्वत फैसला आने की उम्मीद है थी फिर भी  फैसला संविधान के पक्ष में हमारी उम्मीद के अनुरूप नहीं आया है इसलिए ट्रस्ट रिव्यू  पटिशन की तैयारी की जा  रही है जल्दी ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट रिव्यू पेटिशन दाखिल की जाएगी

राजकुमार एडवोकेट 

*संविधान बचाओ ट्रस्ट भारत संघ* 9152095833

*नोट*  *यह मैसेज संविधान में आस्था रखने वालो की जागरूकता के लिए लिखा गया है इसे कोई भी व्यक्ति अपने नाम से भी शेयर कर सकता है*

 
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