Monday, July 1, 2024

मेरी आवाज़ ही पहचान है?



क्यों?
मेरी पहचान ही समण है
मेरी आवाज़ ही समण है


जानिए खुद को मैं समण हूँ
कौन क्या कब कहां क्यों और कैसे?

समणवादी या वमणवादी कौन है?
समणवाद क्या है?
वमणवाद क्या है?
क्या किसकी पहचान है?
क्या किसकी संस्कृति या शाखा संखति, सगा गोती, सगाजन रक्त संबंध पथु पंथ हैं।

हमें नहीं चाहिए
तुम्हारी पहचान तुम्हारी पहचान तुम्हें असफल किया है

कभी किसी के माबाप ने सन्नी नाम क्यों रख दिया शनिवार को पैदा हुआ था ना जन्म तिथि पता ना मरण तिथि पता उसे तो दिन शुभ शनिवार है

लोग जातिदिवस बताये इस दिन पैदा हुए, नाम ये रख दिए, ऐसा समझे कि नाम उसका साफ्टवेयर है जातरुप यानी हार्डवेयर है।

#नामरुप:
जात (#Birth)यानी जन्म रूप (#Form) और
#नाम (#Name)यानी #नामदान (#Namify) से जो पहचान मिलती है वह #शाखा #संखति हैं।

अर्थ-#जन्म भेद से #जातिवाद/#जातिवादी, #रुप (#Form) भेद से वण्ण #रंग/#वर्णवाद/#वर्णवादी और #मन (#Mind) भेद से #मनवाद/#मनुवादी इत्यादि सभी #भेद- #Negative #Discrimination हैं।

भेद तो ये है फिर
तो कभी शूद्र अतिशूद्र अश्पृश्य अछूत अनटचेबल्स दलित रौंदा हुआ, कुचला हुआ टुकड़ों में बिखरा हुआ तो कभी बहुजन तो कभी मूल निवासी आदि निवासी तो अर्जक कमेरा कबिलाई किसान कामगार मजदूर श्रमिक श्रमण कहा गया ये वे कौन लोग हैं जो पहचान थोपते हैं। इकट्ठा नहीं रहने देते संगठन बना बना कर पीठ में पहचान चिपकाते है। इसलिए ये बाहर से शरीर में प्रवेश करती तरंगें है पहचान है। पर शरीर से बाहर की ओर निकलती तरंगें कौन सी है वही असली पहचान है जो आपको चौघड़ी तरंगित करती है। जो ध्यान से आती है।

तो पायेंगे वे भावना शांत है शून्य है न्यूट्रल है सम है समयक है सभी जीव जन्तु पशु पंछी के लिए मैत्री है। जो जीव जगत के दुःखो से पारगू है जो शरीर की वेदनाओं को पूरी तरह जान लिया है अब उसकी भावनाएं पूरी तरह समयक ज्ञान समयक संस्कृति में सम विधान में रमण करती है तरंगित संवेदनाएं समता स्वतंत्रता बन्धुत्व भाव की मैत्री करुणा विचरण करती है न्याय करती हैं अच्छे मार्ग सीधे मार्ग विधि मार्ग उचित मार्ग पर चलती है रम में लीन रहती है वही समण है। इसके विपरित उल्टे चलने वाला वमण है बमण है बमणवाद है बमणवादी है। समण अपने भीतर की तरंगों की बात सुनता है वहीं बमण बाहर की तरंगों से संचालित होता है। बमण बिष है मृत्यु है ये प्रेम के प्रेम विवाह को बिष ही बताएंगे समाज में सतायेंगे जबकि समण जीवन है शरीर की प्राणवायु शक्ति है। जिस तरह सांस मिलने से शरीर खिलखिला उठता है वही सांस छोड़ते ही मुर्छित होता है मुरझाता है फड़फड़ाता रहता है झटपटाता है भ्रम के जाल में भटकता रहता है। इस नफ़रत की आग से शरीर को नष्ट होने से बचाये संघ में रहे सुखी रहे सुरक्षित रहे जीवन से जीवन में प्रेम बनाये रखें। यही जीवन के रहते साश्वत है मृत्यु के आपके लिए कुछ भी शाश्वत नहीं है शुभ नहीं है जो कुछ है जीवन में शाश्वत क्षण है। संघ यानी जीवन में साथ साथ गति प्रगति करना संगति है संखति है जो जन्म से मृत्यु तक लगातार जीवन में चलती है।

#राष्ट्रशासकसमणसंघ (#RSS)

#संघशासनहेतुसंघसंसद (#SSS)

राष्ट्रशासक का अर्थ - धरती की सीमाएं देश की सीमाएं शासक सीमाएं

राष्ट्रशासन का अर्थ - राष्ट्र की शिक्षा, राष्ट्र की सिखा पद

संघ का अर्थ - पशु पंछी जल जंगल पहाड़ पर्वत की भांति डटे रहना इकट्ठा रहना संघ में रहना संघ में सुखी सुरक्षित रहना

संघशासन का अर्थ - संघ की शिक्षा, संघ की सिखा पद, संघ चरया संघादिसेस

संसद - सन्निकट सन्निपात करना, चरिया चरिका करना, बैठक पंचायत करना

'समण' का अर्थ #हम भारत के लोग हम #समता में #रमण करने वाले लोग ...समता की भावनाओं में #विचरण करने वाले वे लोग वे #मनुष्य जो इस #पृथ्वी पर सदा से रहा है और सदा तक रहेगा। #पुरातन समय से भारत में दो संस्कृतियों के लोग #समण और #बमण है। #समणों के #भारत में मैं भी एक समण हूँ। #मैंसमणहूँ
#संघ
#मैंसंघहूँ
#मैंसंघीहूँ
#मैंसमणहूँ
#मैंसमणसंघीहूँ
#शाखा #संगीति
#कांशीरामबहुजनविचारविज्ञानकेन्द्र
#सामाजिकपरिवर्तनएवंआर्थिकमुक्ति
#अम्बेडकरप्रतिभाविकाससंस्थान
#विश्वविद्यालयसत्यशोधकसमाज
#iamsangh #iamsaman
#UniversalTruthSeekersSociety
#VishwavidyalaySatyashodhakSamaj 
#ScientificideasofKanshiramBahujan
#Ambedkarinstituteofintellectualdevelopment
#SocialTransformationandeconomicemancipation

No comments:

Post a Comment

 
Blogger Templates