समणवाद बनाम वमणवाद
कोई व्यक्ति जो समण है और समण लोगों के सुख सुविधा, सुरक्षा व विकास के उद्देश्य के साथ, सेवा करता हैं, तब इस क्रिया को समणवाद कहते हैं। यदि कोई व्यक्ति जो वमण है और समण लोगों के सुख सुविधा, सुरक्षा व विकास की बात करता है या उनकी सेवा करना चाहता है या कुछ खैरात देना चाहता है, तब उस व्यक्ति से यह पूछना चाहिए कि समणों को इस दयनीय हालत में पहुंचाने वाले कौन लोग हैं? यदि वमण ही हैं तब वह वमण व्यक्ति पहले अपने वमणों को जाकर समझाए और कहे कि वे जल, जंगल, जमीन, नौकरी, कोठी, बंगला, फैक्ट्री, बैंक बैलेन्स, सोना चांदी, मोटरकार, अच्छा मेवायुक्त दूध दही का भोजन, ऐशो आराम समणों में अपने बराबर बांटे। अन्यथा वह व्यक्ति सेवा के नाम पर धोखा दे रहा है और यही वमणवाद है। वमण बातें खूब अच्छी-अच्छी करेगा पर समण को कुछ देगा नहीं। इसलिए वमण से बात करके समण अपना समय खराब न करें। सभी समण अपने काम से काम रखें।


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