Thursday, July 4, 2024

अब हम क्या है समण या वमण

 




समण वे लोग हैं जो सम विधान बनाते हैं।
समण वे लोग हैं, जो समता, समानता की नीति बनाते हैं, लागू करते हैं और उस नीति पर जीवन यापन करते हैं। समण वे लोग हैं जो सम बन्धन बनाते हैं और जीवन भर निभाते हैं। समण वे लोग हैं जो सम आचरण करते हैं। समण वे लोग हैं जो अपने समणों को सम मान (सम्मान/समान) भाव से देखते हैं। समण वे लोग हैं जो सम मिलन (सम्मेलन/सन्निपात बहुल) करते हैं। समण वे लोग हैं जो सम अधिकार देते हैं व लेते हैं। समण वे लोग हैं जो समाधि में ध्यान लगा कर जीवन यापन करते हैं। समण वे लोग हैं जो समाधान देते हैं। समण वे लोग हैं जो सम आदान (समादान/स्वीकार) करते हैं। समण वे लोग हैं जो सम आगम (समागम) करते हैं। समण वे लोग हैं जो संग (साथ-साथ) जीते हैं व मरते हैं। समण वे लोग हैं जो समज्ज (मेले) लगाते हैं। समण वे लोग हैं जो सम चरिया (शान्त रहने की चरिया) करते हैं। समण वे लोग हैं जो समग्गाराम (साथ-साथ रह कर खुश रहना/संयुक्त परिवार) का गुण रखते हैं। समण वे लोग हैं जो सम चित्त (शान्त चित) रखते हैं। समण वे लोग हैं जो अपने आप को समता से धारण करते हैं जिन्हें साधु, साध्वी, समणी, समणा, भिक्खु, भिक्खुणी कहते हैं। समण वे लोग हैं जो समथ भावना (शान्ति भावना) करते हैं। समण वे लोग हैं जो समुदायों में आते जाते हैं। समण ही सम॰॰ाा हैं सम॰॰ाा जो नाग सद्द का परियाय (पर्यावाची) है।

समणों की कथा अनन्त है। किसी को नहीं पता कि पहला समण कौन था? कहां रहता था? ये अनन्ता कथा अपना इतिहास बुद्ध के समय से बताती है। जब लोग बुद्ध को महासमण कह कर सम्बोधित करते हैं। धम्म चक्क वति सम रट्ठ असोक महान पिय दस्सी राजा के द्वारा लिखवाई पत्थरांे की किताब से यह समण कथा बाहर निकलती है। समन महापुरिसांे की (पुरिस = नर, नारी) अनन्त जानी अनजानी कथाऐं जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होने से रह गई परंतु लोक कथाओं, लोक गाथाओं, लोक गीतों में व लोक उस्सवों में आज भी जीवित हैं। वे समण राजाओं के असीम सोरय की कथाएं, जिनकी गुंज अन्तलिक्ख में तैर रही हैं। वो जीवक महान समण दुनिया के डॉक्टरों का गुरू जो खोपड़ी खोलकर आपरेशन करता था और मरीज को चारपाई से बांध देता था। वो समण सुदत्त व्यापारी जिसे दुनिया अनाथपिण्डक के नाम से जानती है, जिसका व्यापार दुनिया में फैला था। जिसे सोने के सिक्के बिछाकर जेत राजकुमार को अपना आराम (बगीचा) बेचने पर मजबूर किया। जो गरीबों, लाचारों, बीमारों, मुसाफिरांे को भोजन दान करता था। वो समण चन्द्रगुप्त मोरया जिसके दरबार में विदेशी अपना दूत रखते थे। समण सन्त रविदास जी, समण कबीर साहब, समण नारायण गुरू, समण गुरू चांद ठाकुर, समण गुरू हरिचाँद ठाकुर, समण चोखा मेला, समण गुरू घासीदास, समण गुरू दुर्बलनाथ, समण गुरू गरीब दास, समण अच्छुुतानन्द हरिहर, समण अयोति दास, समण लेखराज सिंह, समण चिम्मनदास, समण वीरा पासी, समण राजा बिम्बसार, समण सन्त जगनाडे महाराज, समण सन्त गोरा कुम्भकार, समण मातादीन, समण दीनाभाना, समण डी. के. खापर्डे, समण दशरथ मांझी, समण कर्पूरी ठाकुर, समण महाराजा गुहराज निषाद, समण महाराज भागीरथ सैनी, समण महाराज शूर सैन, समण सन्त सेवा लाल महाराज बंजारा, समण वीरांगना अवंती बाई लोधी, समण ऊदा देवी, समण सन्त तिरूबल्लवर, समण झलकारी बाई, समण नंगेली, समण वेलावाडी मल्लमा, समण महाराज सातन पाली, समण ललई सिंह यादव, समण डॉ. राम स्वरूप वर्मा, समण ज्योतिबा फुले, समण बिरसा गुण्डा, समण माता सावित्री बाई फुले, समण थनथाई पेरियार ई. वी. रामास्वामी , समण उधमसिंह, समण माता रमाई अम्बेडकर, समण साहू जी महाराज, समण शिवाजी, समण सन्त गाडगे बाबा, समण गुरू नानक, समण सन्त तुकाराम, समण सन्त सेना जी, समण मातादीन, समण दीनाभाना, समण झलकारी बाई, समण भगत सिंह, समण उधम सिंह, समण फूलन देवी, समण फातिमा शेख, समण अन्ना भाऊ साठे, समण नारायण गुरू, समण संभाजी महाराज, समण साहू महाराज, समण जीजा माता, समण अहिल्याबाई होल्कर, समण तन्त्या भील, समण सन्त जगनाडे, समण सन्त जनाबाई, समण सन्त वीर मेघमाया, समण सन्त रामदेव पीर, समण सन्त नामदेव, समण सन्त सावता माली, समण सन्त नरहरी सोनार, समण सन्त तुकडोजी, समण सन्त बसवेश्वर लिंगायतऐ, समण सन्त गुलाब राव, समण ठाकुर पंचानन वर्मा, समण राईचरण सरदार, समण अनुकूल नस्कर, समण सिंदु, समण कानहूँ, समण सम्राट अशोक, समण सम्राट महापदमानन्द, समण सम्राट हर्ष वर्धन व अन्य लाखों समण महापुरूष व महिलाएं।

समण भवन, समण थूप (स्तूप) समण पसादा, समण डेरे, समण विहार, समण 84000 निम्मान, विहार, मनदर, चिकित्सालय (विचिकिच्छालय), प्याऊ, उत्सव, मेले, गंगा स्नान, गढ़, गढ़ी, वप्प मंगल उस्सव, ध॰॰ा तेणस, पकास उस्सव, नाग प॰॰ामी, तीहार, जात-दिवस उस्सव, छत्त मंगल उत्सव, मंगल दिवस, परिणय उस्सव, परिणय मंगल संखार, कण्ण विज्झन संखार (कर्ण वेधन), मंगल मुहुत्त, सिस्स मुण्डन संखार, मच्चु संखार, सामणेर संखार, बाल मुण्डन संखार (बाल से ही बालक पड़ा), वेसाख पूरणमासी, आसार पूरणमासी, (बुद्ध पूरणमासी), नच्च उस्सव गीत वादक, समण लोकगीत, समण जातक कथाऐं, समण कहानियां, समण नाटक, समण छन्द, समण सुत्त, समण इतिहास।

करोडांे-अरबांे समणों की धरती है, यह भारत जिसे सम्राट असोक ने महा पराक्रम से जीत कर महाभारत बनाया था। महाभारत किसी पुस्तक का नाम नहीं है। वरन महाभारत समण सम्राट असोक के द्वारा सेंकडों युद्धों को जीतकर बनाया विशाल, ब्रहद, महाभारत भूभाग है।

समण की महान सभ्यता, जिसे पुरानी भासा में नागरिकता कहते है, यही महान समण लोग पुराने नागर, नाग, नागरिक, नागा, नागों है इस महान समण धरती के।

No comments:

Post a Comment

 
Blogger Templates