Saturday, May 11, 2024

Bicentenary Celebration Phule/फुले की 200 द्विशत वार्षिकी



Bicentenary Celebration Phule/फुले की 200 द्विशत वार्षिकी

राष्ट्रपिता राष्ट्रवाद के संस्थापक फुले के 200 वर्ष वीं जयंती 11 अप्रैल 2027 तभी मनाएगें जब भारत के सभी उच्च संस्थानों में बैठे सत्य शोधक समाज को इकट्ठा कर लेंगे। जिस तार्किक ऊंचाई पर आज हम बैठे है। उस सत्यशोधक समाज की स्थापना फुले द्वारा 24 सितंबर 1873 में हुई। इस यात्रा की शुरुआत महात्मा फुले से होती है। जिस प्रकृति संस्थापित संघ के लिए बुद्ध महाभिनिष्क्रमण हुए। अम्बेडकर बोधिसत्व हुए। समरठ असोक ने पांच शीलरत्ती (हत्या, चोरी, झूठ, व्यभिचार, नशा-नहीं करने के पहली बार समविधान को पत्थरों में शिलालेखों में लिखवाया) को गणराज्यसंघ में स्थापित किया। संघ को पुनपवत्तन हेतु कांशीराम का आजीवन अविवाहित रहना, परिवार विमुक्त रहना, न आय न व्यय का लेखा, आजीवन समाज को संघ परिवार समझा। सदियों से टूटे बिखरे समाज को जोड़ना प्रचार प्रसार करना यह सांघिक ढ़ांचा है। इस तरह से कठोर समार्पण महासमण ही किया करते हैं। बिना संघ के लोकतंत्र नहीं हो सकता। टुटे बिखरे हुए समाज को बहुजन बनाया इकट्ठा किया यही "संघ" है। संघ विचारों की कार्यपरिधि है। आज समतावादी संविधान है समतावादी लोग हैं हम भारत के लोग हैं। आज फिर बिखर गये क्यों? 29 लाख "वाद" में सामाजिक राजनीतिक संगठनों में? इसलिए हमारा संघ समण संघ है। हमें विद्यालय, महाविद्यालय विश्वविद्यालय, शैक्षणिक और सामाजिक संस्थानों को सत्य शोधन करना होगा। जिनके संघ होते हैं जिन जीव जन्तु पशु पंछी के संघ होते हैं वे भूत में नहीं भटकते वे किसी को भला बुरा नहीं कहते, बल्कि वर्तमान में सुखी सुरक्षित रहते हैं।

 

सभी विश्वविद्यालय के शिक्षित विद्वानों से जुड़े जोड़े (दुनिया के रंगमंच में किरदार निभाऐ, फिर पर्दे के पीछे या पर्दे के आगे)

 

जुड़ेंगेजीतेंगे

जिद्द हैजुड़ने की

जब जुड़ेंगेतब जीतेंगे

जितना जुड़ेंगेउतना जीतेंगे

जहां जहां जुड़ेंगे वहां वहां जीतेंगे

जैसे जैसे जुड़ेंगे वैसे वैसे जीतेंगे

जो जुड़ेंगे वो ही जीतेंगे

अभी जुड़ेंगे तो अभी जीतेंगे

100 साल बाद जुड़ेगे तो 100 साल बाद जीतेंगे

जुड़ो और जीतो!

 

'समण' का अर्थ समता की भावनाओं में विचरण करने वाला मनुष्य। जो इस पृथ्वी पर सदा से रहा है और सदा तक रहेगा। आओ जुड़े जोड़े, संघ को नमन करें, संघ को समझे, संघ शक्ति को समझें। 

No comments:

Post a Comment

 
Blogger Templates