1. आदर्श वाक्य (Motto):
एक पृथ्वी एक परिवार एक भविष्य पर शांति / सलाम / शालोम / शांति / निर्वाण / निबाना!
2. दूरदृष्टि (Vision):
हम भारत के लोग... भारत का संविधान: भारत में राष्ट्रवाद की सांस्कृतिक संवैधानिक चेतना को बढ़ाना है।
3. मिशन (Mission) :
"क्रॉस कॉलेज-यूनिवर्सिटी में रहना और क्रॉस कल्चर-डायवर्सिटी में एकता मैत्रीता को बढ़ाना है।"
4. लक्ष्य (Goal/Aim):
"भारत में प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं, छात्रों, शिक्षितजनों में मैत्रीयता और विचार साझा करना है"
5. उद्देश्य (Objective):
"मौन कार्रवाई हिंसात्मक कार्रवाई से अधिक शक्तिशाली है"
6. कार्य योजना (Action Plan):
1) शिक्षित करें: प्रश्न पूछें। आँख मूँद कर अनुसरण न करें। जीव की चेतना बुद्ध/बुद्धि/बौद्धिकता/ तर्कशक्ति/ बौद्धिकता है। अपनी रोशनी स्वयं बनें. खुद को जानिए।
2) आंदोलन करें: प्राकृतिक कानून का पालन करें। वैज्ञानिक सिद्धांतों का पालन करें. विचार, शब्द और कार्य से.
3) संगठित करें: समुदाय को एकजुट करें। भारत और विश्व के सभी नागरिकों के लिए समान अवसर।
7. तरीका (Mode of Metta):
द्वंद्वात्मक मैत्ती संवाद गतिविधि-भौतिक या आभासी (Metta Activities-Physical or Virtual)
8. निशाना (Outcome target)
एक दिन में एक आदमी से मिलने के बारे में सोचना- बात गतिविधि संगीति करना है।
9. "दस गोल्डन नियम" (Ten Golden Rule)
1. समण संघ में केवल समण ही आ सकते हैं
2. समण संघ में कभी चन्दा नहीं लिया जायेगा
3. हम केवल समण हैं, संघ में कभी जाति का अभ्यास नहीं होगा. यानि किसी भी जाति के नाम का संबोधन नहीं किया जायेगा
4. समण संघ में केवल संघवाद रहेगा, व्यक्तिवाद को कोई स्थान नहीं
5. संघ में कभी भी पद-प्रतिष्ठा-मंच-माला को कोई स्थान नहीं होगा.
6. समण संघ का पंजीकरण कभी नहीं होगा
7. संघादिसेस यानि संघ का आदेश सभी के लिए सबसे ऊपर रहेगा
8. संघ राजनीति में कभी नहीं जायेगा
9. संघ घातक की वापसी संघ में कभी नहीं होगी
10. उपरोक्त 1 से 9 तक के नियम संघ का आधार हैं, ये ना कभी बदले जायेंगे और ना ही कभी ख़त्म किये जायेंगे और ना ही कभी अमान्य किये जायेंगे।
10. छह सामान्य नियम (Six Genral Rule)
1. सभी उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों से केवल एससी/एसटी/ओबीसी/आरएम सदस्यों को जोड़ना।
2. विश्वविद्यालय में मैत्रीता सुरक्षित अभयवातावरण बनाना।
3. उच्च शिक्षण संस्थानों/विश्वविद्यालयों में अध्ययन एवं अध्यापन पर परामर्श।
4. किसी भी समस्या पर अपने विचार व्यक्त करना, व्याख्यान देना तथा जानकारी संप्रेषित करना।
5. भारत के शैक्षणिक संस्थानों/विश्वविद्यालयों में शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं छात्रों के बीच आपसी परिचय बढ़ाना।
6. विश्वविद्यालय सत्यशोधक समाज में उपरोक्त उद्देश्य पर अनुशासन बनाये रखना।
"संघ की शक्ति बने संघ की शक्ति ही पुरातन है-आदि अन्त मध्य में भी सनातन है।"
साधुसाधुसाधु-वाद! संघे शक्ति युगे युगे!! संघे शक्ति नमामि!!!
-:संघम नमामि:-
विश्वविद्यालय
सत्यशोधक समाज / University
Satyashodhak Samaj

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