Saturday, May 11, 2024

समण संघगान


समण संघगान

सुपटिपन्नो समण संघो, उजुप्पटिपन्नो समण संघो,

न्यायपटिपन्नो समण संघो, सामीचिपटिपन्नो समण संघो।

एस समण संघो,

आहुनेय्यो, पाहुनेय्यो, दक्खिणेय्यो, अंजलीकरणीयो,

अनुत्तरं पुञ्यक्खेतमं लोकस्सा'ति।।

 

संघं जीवित परियन्तं सरणं गच्छामि।

ये च संघो अतीतो च, ये संघो अनागतो।

पच्चुपन्नो च ये संघो, अहं वन्दामि सब्बदा।

नत्थि में सरणं अञ्यं, संघो में सरणं वरं।

एतेन सच्चवज्जेन, भवतु सब्ब मंगलं।

संघं संघं संघं नमामि।।

 

आधुनिक पालि हिन्दी में अनुवाद:

अच्छे स्वतंत मार्ग पर चलने वाला समण संघ।

सीधे बन्धुत्त मार्ग पर चलने वाला समण संघ।

विधि न्याय मार्ग पर चलने वाला समण संघ।

उचित समता मार्ग पर चलने वाला समण संघ।

ऐसा समण संघ। यह समण संघ।

जिसे आहुति (सबकुछ) देने योग्य है।

जिसे पाहुना (अतिथि) बनाने योग्य।

देखने (समझने) के योग्य है।

हाथ जोड़ने (आदर करने) के योग्य है।

यह लोगो के पुण्य खेत में लाजवाब है।

मैं जीवन भर इसके साथ रहने जाता हूँ।

पहले जो भी समण संघ रहा है।

और जो समण संघ रहेगा।

और जो वर्तमान में समण संघ है।

मैं इस समण संघ को वन्दन करता(ती)हूँ।

मैं समण संघ के अतिरिक्त अन्य किसी के भी साथ रहकर संघर्ष नहीं करुंगा(गी)।

इस सच्ची घोषणा से

सभी का मंगल हो

मैं संघ, संघ, संघ को नमन करता(ती)हूँ।

 

'समण' का अर्थ समता की भावनाओं में विचरण करने वाला मनुष्य। जो इस पृथ्वी पर सदा से रहा है और सदा तक रहेगा। आदि अन्त मध्य तक संघ की शक्ति सनातन है।


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