सप्ताहिक कार्यवृत्त:
आज दिनांक 28-04-2024 को विश्वविद्यालय सत्यशोधक समाज द्वारा प्रत्येक रविवार की सप्ताहिक श्रंखला वार्ता में केन्द्रित शीर्षक है-
Golden Philosophy of Sangh and saman cultural roots संघ का स्वर्णिम दर्शन और समण संस्कृतिक जड़े
By
Prof. C. D. Naik
(Rtd).
Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar University of Social Science, MHOW, Madhya Pradesh.
प्रोफेसर सी0 डी0 नायक सर ने बताया कि बदलते तकनीकी युग के परिवेश में बंद कमरे की संगोष्ठी को विश्वकाय वर्चुअल संगोष्ठी के माध्यम से समण दर्शन को पहुंचाया जाना चाहिए। 29 लाख टुकड़ों में टूटे बिखरे सामाजिक राजनीतिक संगठनों संस्थाओं को अपने व्यक्तिवाद से निकलकर विश्व की सभी लोकतंत्र की जड़, समण संस्कृति की जड़ "संघ" है, संघ ही सुख सुरक्षा विकास की मूल जड़ है। इसलिए "संघवाद" को अपनाये पुरातन संघ का पुनपवत्तन करें, समण दर्शन को समझे जो सदा से समता पर, जो सभी अतिशय से परे संतुलन पर, बराबरी पर, मध्यम मार्ग पर आधारित रही है। इसी को संविधान (सम+विधान) कहते हैं जो दोनों अतिशय से अन्याय से रक्षा करता है।
ये शिक्षा ईंट गारो की बनी विद्यालय महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की दीवार नहीं सिखाएगी और सिखाएंगे वहीं जो समता की भावनाओं विचरण करते हैं। फिर वो प्रोफेसर हो, शिक्षक हो, कोई भी शिक्षित पेशेवर हो व समाज सेवी हो या सत्यशोधन करने वाले शोधार्थी हो या विद्यार्थी, समण संस्कृति की पहली छोर शून्य है तो दूसरे छोर में बुद्ध है। इस वेदना को पार कराने वाला पारगू (बुद्ध) कहलाता है। जिस गुरु शिष्य की एक लम्बी परम्परा है। इन दोनों छोर से बंधे रहना सुत्त है। पाली में धम्म यानी प्रकृति सुत्त यानी नियम प्रकृति के नियम से बंधे रहना धम्मसुत्त कहलाता है। आपके मन को परिवर्तित करने वाले नियम को पाली में पवत्तनसुत्त कहते है। प्रकृति के नियमित नियम से बंधे रहना-परिवर्तित होते रहना "धम्मचक्क पवत्तनसुत्त" कहलाता है। निष्कर्ष निरांतर हमें समता की भावनाओं में विचरण करते रहना ही संघिक प्रक्रिया है। यही परिवर्तन प्रकृति का सनातन नियम है जो सदा से चली आ रही है आगे भी चलती रहेगी और हम आदि अन्त में भी समतावादी है संघ परिवार में हैं।
Ten Golden Rule of Saman
Sangh
1. Only saman be innate members.
2. Never ever Chanda in sangh.
3. Never ever caste practices.
4. Only Sanghwad no individualism in sangh.
5. Sangh never offer to postposition daise and garland.
6. Never ever the registration of saman Sangh.
7. Order of the sangh is Ultimate.
8. Sangh will never enter into politics.
9. Never ever return of the sangh traitor.
10. Nine rules unchangeable eternal and permanent.
"दस गोल्डन नियम" (Ten Golden Rule)
1. समण संघ में केवल समण ही आ सकते हैं।
2. समण संघ में कभी चन्दा नहीं लिया जायेगा।
3. हम केवल समण हैं, संघ में कभी जाति का अभ्यास नहीं होगा. यानि किसी भी जाति के नाम का संबोधन नहीं किया जायेगा।
4. समण संघ में केवल संघवाद रहेगा, व्यक्तिवाद को कोई स्थान नहीं।
5. संघ में कभी भी पद-प्रतिष्ठा-मंच-माला को कोई स्थान नहीं होगा।
6. समण संघ का पंजीकरण कभी नहीं होगा।
7. संघादिसेस यानि संघ का आदेश सभी के लिए सबसे ऊपर रहेगा।
8. संघ राजनीति में कभी नहीं जायेगा।
9. संघ घातक की वापसी संघ में कभी नहीं होगी।
10. उपरोक्त 1 से 9 तक के नियम संघ का आधार हैं, ये ना कभी बदले जायेंगे और ना ही कभी ख़त्म किये जायेंगे और ना ही कभी अमान्य किये जायेंगे।
विश्वविद्यालय सत्यशोधक समाज / University Satyashodhak Samaj

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