समण संघ - जुड़ों और जोड़ो
बाबा साहब ने कहा था संगठित रहो संगठित तो हुए नहीं संगठन संगठन में बट गए
इकट्ठा होने के लिए जूम मीटिंग और फिजिकल मीटिंग से लगातार 36 महीने से प्रयास जारी है
समाज पराधीन है इसका समाज को अहसास नहीं है। रोज जूम पोर्टल पर पराधीनता की अवस्था पर अपनी चिंता और चिंतन को परस्पर सांझा किया। हम अपनी सोच और विचार का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं करेंगे तब तक हम समाज को सही और सकारात्मक दिशा नहीं दे सकते हैं।
पराधीन से स्वाधीन होने के लक्ष्य को अमलीजामा पहनाने से पहले इस विचार को जलूस निकाल कर/ जगह फिजिकल मीटिंग से समाज में समर्थन जुटाना महत्वपूर्ण काम है। हम समण संधियों को लोगों को यह समझाना होगा कि बिखर-बिखर रहने में नुकसान और जुड़कर रहने में सदा लाभ है। अकादमिक भाषा में कह सकते हैं कि समाज की सभी तरह की गतिविधियों को असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र में लाना है, नहीं तो समाज को शोषण की बुरी मार से कोई नहीं बचा पायेगा। समण संघ से जुड़ना अंतिम उपाय है
पराधीनता से स्वाधीनता की ओर सफर कैसे होगा। इस सफर को कब से शुरू करना है और कैसे शुरू करना है। आओ साथियों अब इस बात पर विचार विमर्श कर लेते हैं। ये मलाल बाद के समय के लिए नहीं छोड़ना है
जुड़ेंगे तो जीतेंगे सम्मान से समाज में जिएंगे जब इक्कठा होंगे तो दुश्मन भी जाति जुल्म करने से 100 बार सोचेगा ।


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