समण संघ अपना है भारत या भारत से बहार रहने वाले सभी समण भाई-बहनो का अपना समण संघ है समण परिवार है संघ की राह पर चलने वाला समण भाई समण बहन कभी दूखी नहीं होता है संघ की राह पर सभी समण भाई बहन को एक-दूजे का हाथ पकड़कर चलना होगा तभी हम मंजिल को सुख सागर को प्राप्त कर सकते है संघ की राह पर चलने के लिए अपनी मानसिक शांति का होना बहुत जरूरी है हम समणों की मानसिक परेशानी का कारण है, हमारी पुरानी रूडीवादी परंपराये नशा,व्यक्भिचार, लोग दिखावा करना, दहेज लेना-देना, मृत्यू भोज करना, फिजुलखर्जी करना आदि-आदि इन सबको त्यागकर समण संघ की राह पर सभी को चलना होगा समण संघ के नियम अपनाकर जीवन जीना होगा जीवन के उत्थान में जो भी परंपराये बाधक है उन सबको छोड़ना होगा और समण कल्चर को अपनाना होगा समण संघ शरण आना होगा संघ शरण आओ जीवन का का कल्याण करो आज तक जिन्होने भी संघ की शरण ली है संघ के नियम अनुसार जीवन आचरण किया है आज वह सब सुखी जीवन जी रहे हैं वर्तमान समय में हमें अपने दुख से मुक्ति चाहिए तो संघ के नियमों को अपनाकर संघ की शरण में आना होगा जिसमें सभी का कल्याण होगा आज वर्तमान समय में संगठन की नहीं संघ की आवश्यकता है सभी महापुरुषों ने शिक्षित होकर संघ में रहने को कहा है विश्व गुरु महासमण तथागत बुद्ध ने भी कहा है संघम शरणम गच्छामि संघ की शरण में आओ संघ से ही सबका कल्याण होगा -समण अनूप टीकली
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