समण क्या है ?
भारत में , जब बाहरी लोग आये तब उनको यहाँ के लोगों ने उन बाहर के लोगों को वम कहा । वम का अर्थ है विपरीत ।जैसे वाम पक्ष
और दाहिना पक्ष एक दूसरे के विपरीत होते हैं । बाहिर के लोग विपरीत कैसे थे ? बाहर वाहिय बरहिय ब्राही ब्रहा के लोगों का रंग , रूप , कद काठी , रहना ख़ाना , बोल चाल, नाच गाना , शादी संस्कार सब यहाँ के लोगों के विपरीत थे , यहाँ के लोगो के सम , बराबर नहीं था
। आज भी वम लोगों का संस्कार सम लोगों के संस्कार के बिल्कुल वम या विपरीत हैं l इसीलिए यहाँ के सम लोगों ने बाहर से आये लोगों को वम कहा । किसी मूल शब्द के बाद में यदि न या ण या ङ लगा दे तो वह संज्ञा ( known) बन जाता हैं । सम से समण और
वम से वमण ।
इसीलिए समण लोग यही के हैं । भारत के मूल लोगों को समण कहा गया .

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